प्रेयसी : Season–1
ढोल तू बजना घड़ी भर 🪘
चलकर जहाँ रंग रागिनी,
रैना चली रंग रात को,
पलभर बताना बात वो,
निमिया तरे इक डाल पर,
बोले पपीहा बात जो,
तू ओढ़ाकर नीली चुनरिया,
उड़ चलो सुख की नगरिया,
भोर फूटे भाभियों से आशीष भर,
लेकर विदा डोला हुमचकर,
मेरी नगरिया अब राम की होगी,
धीर धरकर ही तनिक विश्राम भी होगी,
सब्र में रुकना नहीं मेरे लिए लेकर ठहारा,
केवल बची इस टोकरी में अश्रु धारा,
टकटकी नजरे गड़ाए,
डोलियाँ भी गीत गाती,
पाकर तले विश्राम ले,
चलतीं कभी डोला सुनाती,
पूस में ओढ़े चदरिया शाम सी
सावन बरसती बूँद में उसको भिगाना,
ढोल तू संदेश भए हर में गीत में
संगीत ये उसको सुनाना..
भूलकर भटका मिला राही कोई..साखी तुझे!
कल का सवेरा साँझ क्या ?
तूं भूलना बातें मेरी.. साखी मुझे!
पाँव की पायल बजे जो जान ये,
आँसू बहे तो थाम लेना,
प्रीत की नैना बहे जो प्रेम में,
पल भर उन्हें विश्राम देना,
ढोल तू बजना घड़ी भर,
घूँट भर मुख प्यास लेना।
किताब : मेरा पहला जुनू इश्क़ आख़री
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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